स्थायी IDs पर
आपके सारे जीवन का
सार लिखा हुआ है?
डाटा लिखा हुआ है?
पैदाइश से ही?
या
उससे भी पहले से?
स्थाई IDs
उस स्टोर की तरह हैं
जो सबसे पुराना है।
पढ़े लिखे और कढ़े लोग
किसी भी स्टोर की तरह
अपनी IDs का
खास ख्याल रखते हैं
आम आदमी को
उनका महत्त्व ही
नहीं पता होता?
जो कोई स्टोर
जितना पुराना है
उसमें अगर
उतना ही पुराना कबाड़ है
तो?
ज़िंदगी भी कबाड़ जैसे?
इसलिए
किसी भी स्टोर को भी
साफ़ सफाई की जरुरत होती है।
जो आपके काम का नहीं है
जिसकी
कोई खास वैल्यू भी नहीं है?
उसे चलता क्यों नहीं कर देते?
या दे क्यों नहीं देते किसी को?
एक निगाह तो डालो
क्या क्या है ऐसा वहाँ?
उस पढ़े लिखे और कढ़े में
और आम आदमी में
फर्क ये है
वो सिर्फ़ कीमती और
काम का सामान रखता है?
और आप?
अकसर अपने काम का
और कीमती सामान भी
उसको सौंप देते हो?
और अकसर कबाड़ पर
या खामखाँ सी बातों पर
लड़ते झगड़ते रहते हो?
जो घर जितना साफ़ है
या दाग़ रहित है
उतना ही उसका रुतबा भी?
सच है क्या?
या जरुरी नहीं?
स्टोर की तरह ही
एक निगाह
उस रसोई पर?
बैड रुम पर?
बाथरुम पर?
ऐसे ही
घर के हर एक कोने पर?
गुप्त सिस्टम के अनुसार
घर के हर हिस्से के
कुछ और ही मतलब हैं।
कुछ कुछ ऐसे
जैसे राजे महाराजों की
लड़ाईयों के?
युद्धों के?
राजनीती के जैसे से?
राजनितिक सिस्टम बनाने वाले
खामखा से
और
जाने कैसे कैसे से?
सामान से
यूँ ही जैसे?
आपके अपने घर तक में
बदलाव करते रहते हैं
और वो भी ज़्यादातर
आपकी जानकारी के बिना?
संभव है?
या ऐसा हो रहा है?
आपको तो लगता है
ज़्यादातर सामान
आप खुद ही लाएँ हैं?
अपनी पसँद से?
या शायद
कभी अपनी पसँद से?
और अब वो कबाड़ हो चुका?
मगर फिर भी रखा है
ऐसे ही?
यहाँ
सामान की बात हो रही है
आदमी की नहीं
कहीं उन्हें भी सामान सा
कबाड़ समझने लगें।
या शायद
बहुत से समझते ही ऐसे हैं?
जैसे
कैसे कैसे
सामान की भी किम्मत?
और आदमी की भी कुछ नहीं?
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