इशारों ही इशारों में? Semiotic Lab Culture (UMCL) 5

इशारों ही इशारों में?   बात बन जाती है?  और बात बनते बनते?  बात टल भी जाती है? या बिगड़ भी जाती है?  होते देखा है ऐसे भी कहीं? गुप्तगू में? म...

Tuesday, August 13, 2024

कोरे कागज़ कहीं नहीं जाते। मगर चंद शब्द लिखे कागज़? 13

 कोरे कागज़ कहीं नहीं जाते 

वो अकसर कोरे ही रह जाते हैं? 

फिर उन्हें आप 

नाव बना 

किसी के घर की तरफ बहा 

पानी में चलाएँ? 

या पेपर प्लेन बना 

पड़ोस वाली लड़की के 

बारजे की तरफ़ उड़ाएँ। 


मगर 

इन्हीं पेपरों पर लिखे 

चंद शब्द 

मामूली से दिखने वाले 

वो चंद शब्द 

तख़्त हिलाते हैं 

बड़े बड़े तानशाहों के 


डरते हैं 

बड़े बड़े तानाशाह भी उनसे 

और हड़बड़ी में 

वो ऐसे ऐसे 

चंद शब्दों वाले पेपरों को 

कहीं छुपा देते हैं जैसे? 


वो ऐसे ऐसे पेपरों पर लिखी 

किताबों पर पाबन्दियाँ लगाते हैं 

चाहे वो लिखी हों 

किसी मामूली सी लड़की ने 

वो डरते हैं 

उनमें लिखे 

उन तानशाहों की 

असलियत के उजागर होने से 


वो उस लड़की को 

अपने so called अफसरों द्वारा 

ड्रामा करवा 

उसका अपहरण करवाते हैं 

एक बिलकुल खाली जगह से 

एक ऐसे ATM से 

जहाँ छुट्टी वाले दिन 

शायद ही कोई जाता हो

 

रात के अँधेरे में 

सुन ए रिया (SUNARIYA)

नामक जेल में डाल देते हैं 

और जाने उसे वहाँ 

क्या क्या सुनाते 

या दिखाते या समझाते हैं। 


तारीख भी ऐसी चुनते हैं 

जब आगे कोई और छुट्टी हों 

ताकी कोर्ट को भी 

बेल देने में वक़्त लगे 


इमरजेंसी के नाम पर 

वो उस पर देश द्रोह ठुकवाते हैं 

ताकी 

उसको देश से बाहर जाने से 

कम से कम कुछ साल 

रोका जा सके 


क्यूँकि 

उसने ऐसा कुछ किया तो हुआ नहीं 

की देश द्रोह ठोका जाता 

हाँ 

केस को

थोड़ा ज़्यादा वक़्त घसीटा जा सकता है 


कुछ वक़्त ख़राब करवा 

वो देश द्रोह 

so called जनसुवाई में जाता है 

देशद्रोह और जनसुवाई? 

और कोई मामूली सी 

स्टम्प के साथ 

स्वाहा हो जाता है?  

ऐसा ही?

या गलत लिख दिया कुछ?


किसी समाज के अनुसार 

इतनी मामूली सी स्टम्प? 

और 

इतना बड़ा मुकदमा ठोकना?   

और 

किसी समाज के अनुसार 

आगे और ईलाज करेंगे तेरा?  

समझ अपनी अपनी?


वो कागज पर उतरे कुछ शब्द 

जो भारत में कुछ साल 

बिलकुल बँध रहे 

जनता की निगाहों से  

वो भी गुंडागर्दी से 

किसी न्यायलय के आदेश से नहीं 


पता चलता है 

जाने किन पतों के सहारे 

US और UK में 

धड़ले से बीके?   

वो भी लिखने वाले की 

जानकारी ना होते हुए। 


कोरे कागज़ कहीं नहीं जाते 

वो अकसर कोरे ही रह जाते हैं? 

फिर उन्हें आप 

नाव बना 

किसी के घर की तरफ बहा 

पानी में चलाएँ? 

या पेपर प्लेन बना 

पड़ोस वाली लड़की के 

बारजे की तरफ़ उड़ाएँ। 


हाँ 

उन पर लिखे चंद शब्द 

और भी बहुत कुछ करते हैं। 

जाने आगे?

और क्या क्या करते हैं?

Monday, August 12, 2024

Module "जाती", हूँ मैं? CA ST CA ST ING? (IDs & LAIs) 12

 Constructive or Destructive Module?

"जाती",  हूँ मैं? CA ST CA ST ING?


Casting "Out" Cast? 


जाती,

हूँ मैं?

जल्दी 

है क्या?

Out 

Skirt हूँ मैं?

Err 

Out 

Cast हूँ मैं?   


धप्पा या धब्बा जैसे कोई?

पैदाईश से ही?

माथे पर मोहर जैसे कोई?

या रतन जड़ा हो जैसे कोई?

SWRAN का?

सोने या चाँदी का?

GO LD?

SIL VER जैसे कोई? 


या हीरा जैसे कोई?      

DIA M OND सा?


METAL?

MI RR OR?

या 

Periodic टेबल का 

कौन सा Element?

Period!

Sic!


B  R  ASS?

KASHI?

VARA NASHI?

MATH URA?

VRINDHA VAN?

RISHI KESH?

HARI DWAR?  


या?

नाश कैसे कैसे?

बड़े लोगों के ये तास ?

या CHESS के दॉँव ?

कैसे कैसे?


जो बच्चियों पर ही रख देते हैं 

धब्बे या ठप्पे?

जैसे जाती कोई?

CAST CAST ING?


वो धब्बे वाली?

या ठप्पे वाली? 

आपकी बहन भी हो सकती है? 

आपकी बुआ भी?

बेटी भी?

माँ भी? 

चाची भी?     

ताई भी? 

दादी भी?

और बहु भी?  

  

खुद ही 

कोई CAST 

CAST ING  करके 

क्या मार देंगे? 

आप अपनी बहु को?

या बेटी को?

या बहन को?

या भाभी को? 

या बुआ को?

या माँ को?

या चाची को?

या ताई को?

या दादी को?


या ऐसे ही 

किसी पति को?

भाई को?

बेटे को?

भतीजे को?

बाप को?

चाचा  को?

ताऊ को?

फूफा को?

मामा को?

दादा को?                  


कैसे धब्बे हैं ये?

कहीं बीमारी से जैसे अटैक?

तो कहीं ऑपरेशन से?  

और कहीं?

दुनियाँ से ही चलते करने जैसे?


ये जड़ दिए हैं जैसे 

हमारे शरीर पर?

हमारे रिश्तों पर?

घरों पर?

गली मौहल्लों पर?

गाँव, शहरों पर?

शिक्षा के संस्थानों पर?

स्वास्थ्य के संस्थानों पर?

किताबों में 

पहनाओं में?


जीव जन्तुओँ पर?

और निर्जीवों पर भी?     

देश में भी 

और विदेश में भी?

कोई  रतन जैसे? 


झलकते हैं जैसे 

शीशे से?

पानी से?

खान पान से?


लहराते हैं जैसे?

इठलाते हैं जैसे? 

हवा से?

CIVIL से?

या DEFENCE से?


खुशबु से?

या बदबू से?

सुगँध से?

या 

दुर्गन्ध से?  

महक से?

या सड़ाँध से? 

   

HELICOPTER से?

AIRCRAFT से?

PLANE से?

या?

FIGHTER JET से?

या DRONE से? 


आह CAST?

कैसी कैसी CAST?

कहीं वो सफ़ेद है?

अटैक ?

और कहीं?

काली है?

अटैक?

या गाली जैसे कोई?

या धब्बा 

या धप्पा जैसे कोई? 

 

कहीं हाथ पर?

कहीं पाँव पर?

कहीं माथे पर?

 कहीं चेहरे के इस हिस्से पर?

और कहीं?

चेहरे के उस हिस्से पर?

कहीं शरीर के इस हिस्से पर?

कहीं शरीर के उस हिस्से पर?  

और 

कहीं पुरे ही शरीर पर?

किसी निशान या 

वज़न सा छुपा हुआ जैसे?


कोई अटैक?   

या कोई बीमारी जैसे?  


किसने किया है?

क्यों किया है?   

सबसे अहम कैसे किया है? 

KARMA ने?

DHARMA ने?

या SYSTEM ने?

या किसी 

ऐसे से ही कोड ने ?

या कोढ़ ने?


जानना चाहेँगे 

ये KARMA 

DHARMA 

या SYSTEM कौन हैं? 

Sunday, August 11, 2024

आस्था, विश्वास और टैस्टिंग? (IDs & LAIs) 11

 सुना है हिन्दू हैं हम तो?

और हमारे यहाँ 

भगवान 

और भगवनियों की 

एक लम्बी लिस्ट?

 

जैसे कदम कदम पर 

हमारी बोली बदलती है 

वैसे ही 

भगवान और भगवानी भी? 

देव और देवी भी? 

और उनके मँदिर भी?   

कभी सोचा क्यों?


बाकी धर्मों की तरह?

हिन्दुओं का भी 

एक ही भगवान 

या भगवानी क्यों नहीं?

एक ही देव 

या देवी क्यों नहीं?


बाकी धर्मों में 

एक ही भगवान 

या भगवानी है 

देव या देवी है?

तो और कई तरह के 

ऐसे से ही 

रौचक से तथ्य भी? 


एक कोशिश है 

इन सबको 

तर्क वितर्क पर 

जाँचने परखने की। 


आस्था, 

विश्वास जैसे विषयों को? 

तर्क वितर्क पर 

जाँचना? 

या परखना?

आँख बँध कर 

सीधा सीधा 

मान लेना क्यों नहीं?


जैसे 

हमारी दादी माँ 

चाची ताई 

मानती आयी हैं?   


आस्था विश्वास 

और टैस्टिंग?  

कैसा लगा आपको ये विषय?

थोड़ा और जानने की कोशिश करें इसे? 

Wednesday, August 7, 2024

Design Metaphoric? सत्ता और पत्ता की कहानी? 7

सत्ता और पत्ता की कहानी? 

कहानी या लड़ाई? 

सत्ता और सट्टा 
दोनों एक ही बात हैं क्या?
ऐसे ही 
जैसे पत्ता और प्रशनचिंह?  

सत्ता एक फिल्म आई थी?
या पत्ता?
तास के पत्ते जैसे?
इक्की, दुग्गी, तीगी वैगरह?    

तास खेलते हैं आप ?
कौन से वाला खेल?
बच्चोँ वाले?
या थोड़े बड़ों वाले?

सिर्फ़ शीशा दिखाना है?
इक्की 
मेरी भी इक्की 
दुग्गी 
मेरी भी दुग्गी?
कुछ कुछ ऐसे ही?

या आपके खेल में 
इनसे आगे भी बहुत कुछ है?
आप सिर्फ़ इक्की, दुग्गी नहीं मिलाते?
उससे आगे भी रँग रुप है?
गुण अवगुण हैं? 
तासीर हैं, तेवर हैं?
अपने पराये हैं? 
और भी ना जाने 
कैसी कैसी ऊँच नीच हैं?
   
जैसे?
आप राजे महाराजों वाली 
सत्ताओं के खेल खेलते हैं?
वहाँ ऊप्पर 
OFFICERS वाली दुनियाँ में 
वही खेल खेले जाते हैं। 

जो कोई,  
कँधे से ऊप्पर जितना मजबुत होता है  
वो जीत जाता है?
बाकी?
या तो हार जाते हैं?
या उनकी रक्षा में लगे होते हैं?

राजा रानी की रक्षा?
राजमहलोँ की रक्षा?
कितने स्तर की है?
4 - 5?
6 - 7?
10 - 11?

और आप?
इसके कौन से स्तर पर हैं?
वो समाज में आपकी हैसियत, 
औकात, पिछड़ापन या आगे बढ़ते 
दायरों और समुहों को बताता है। 
आपकी या आपके अपनों की 
घर की या आसपास की 
सुरक्षा का दायरा क्या है?   

राजा रानी को बचाना है?
राजमहल को बचाना है?
ये तो कल की बातें हैं ना?
आज?
ऐसे से ही कुछ ख़ास 
औहदों को बचाना है?
कोढ़ों या कोडों  को बचाना है?

वो कोड आपके अपने 
या आपके अपनों के हैं?
या आप किन्हीं और के मोहरे 
या डम्मी मात्र हैं?
कैसे जानेंगे ये?
अगर आपको आज के समाज के 
कोड या कोढों का ही पता नहीं तो?    

कौन हैं आज के वो ख़ास?
राजा रानी?
ओहदे?
या कोड?

वो कोड
आपके लिए 
या आपके घर के लिए?
या आपके समाज के लिए?
कितने भले हैं?
या बुरे हैं? 

क्या आज भी आप 
कोई राम ढूँढ रहे हैं?
आज की सीता भी 
ज़मीन में समाती है?
सिर्फ़ किसी सिरफ़िरे के 
कुछ कहने भर से?

या जँगल भेझ दी जाती है?
किसी केकैयी द्वारा?
ऐसी सी ही कोई कहानी 
आज की कुन्ती की भी है?
कितने पति थे उसके?
कितने बच्चे?
और कैसे?

आज भी कोई करण है?
और दुर्योधन और दुशाषन भी?
आज भी कोई दशरथ है?
केकैयी और धृतराष्ट्र भी?

आज भी कोई कंस है?
और 
गाँधारी और द्रौपदी भी?
आज भी कोई औरत 
बिना उससे पूछे 
उसकी मर्जी के बिना 
4 -5 में बाँट दी जाती है?
कहीं ऐसा कुछ 
आपके बच्चों के साथ भी 
शुरु तो नहीं हो चुका? 

ये सब राजघराने हैं?
या लीचड़ों के अड्डे?  
आज भी कोई भीष्म पितामह है?
जो काँटो की सेज़ पर सोता है?    
वो सब जो आपने 
पुराने जमाने की किताबों में पढ़ा है?
बड़ा ही अजीबोग़रीब 
और ऊटपटाँग सा?
क्या वो सब आज भी होता है?  

या?
आज उससे भी ज्यादा कुछ है?
भला भी और बुरा भी?  
जैसे Conflict of Interest की राजनीती 
कल थी, आज भी है 
और आगे भी रहेगी 
आप उसमें किसी के मोहरे ना रहें 
डम्मी मात्र बनकर ना रह जाएँ 
उसके लिए भी 
इस खेल को जानना बहुत जरुरी है। 

क्यूँकि 
आज कन्धों से ऊप्पर का हिस्सा 
थोड़ा ज़्यादा ही चलता है 
और सिर्फ़ गिने चुने लोगों का ही नहीं 
जितने ज़्यादा, जितना ज्यादा 
पढ़ना लिखना और सोचना सीख जाएँ 
उतना ही। 

तो आप भी पढ़ते, लिखते हैं?
पढ़ना लिखना सिर्फ़ डिग्री वाला नहीं?
सिर्फ़ कुर्सियों या औहदों के लिए?
कुछ पन्ने 
या सर्टिफिकेट या पॉइंट्स मात्र? 
इकट्ठे करते जाने वाला नहीं 
सच का जानने समझने वाला 
या योगदान करने वाला ज्ञान?
पढ़े हुए भी और कढ़े हुए भी?
या कम डिग्री, सर्टिफिकेट होते हुए भी 
कहीं ज्यादा कढ़े हुए?     

तो तासों से आगे 
और कौन से खेल खेलते हैं आप?
क्या आज के खेलों का 
अंदाजा तक है आपको?
ख़ासकर उनका 
जो आदमी को रोबोट बनाते हैं?

कोई भी नहीं?
तो भी, समझना तो जरुरी है 
क्यूँकि 
आदमी के रोबोट बनने में 
या आदमी बने रहने में 
बस इतनी सी जानकारी 
या अज्ञानता की दूरी है।   

Tuesday, August 6, 2024

धागा तंत्र और कठपुतलियाँ ? 6

 Manipulation and Alterations of Natural Processes? 


आपने कठपुतलियों के खेल 

बहुत देखे या सुने होंगे?

दुनियाँ कुछ कुछ ऐसा सा ही तमाशा है 

कुछ वो खेल खिलाने और दिखाने वाले हैं 

तो कुछ उनके इशारों पर नाचने वाले?

खिलाने और दिखाने वालों को पता होता है 

वो क्या कर रहे हैं 

मगर, उनके इशारों पर नाचने वालों को?

जाने या अनजाने?     


किसी की सफ़ेद जीन्स के 

धागे निकालना और सफ़ेदी भुगतना? 


आपने कहीं कोई जीन्स 

थोड़ा आल्टर करने को दी

वो बहुत दिनों वहीं पड़ी रही 

और आल्टर भी नहीं की गई। 

मगर कहीं से उसके कुछ धागे 

जरुर निकाल दिए गए? 


उसके काफी वक़्त बाद 

आपको कहीं से बताया जाए 

उस, टेलर को तो 

ये बीमारी हो रखी है 

ऐसी कोई बीमारी होती है क्या? 


किसी नैचुरल प्रोसेस को

कुछ खास तरीकों से बढ़ाया 

या घटाया जा सकता है

या सिर्फ़ 

दिमाग़ी भर्म पैदा किया जा सकता है? 


जीन्स या कोई भी कपड़ा 

आना-जाना है। 

ऐसे-ऐसे बहानों से भी 

लोगों को क्या बीमार करना? 


मगर ये दो धारी तलवार है,

जिसे राजनीतिक 

"सामांतर घड़ाईयाँ" कहते हैं। 


सोचो

आपसे कोई 

किसी का नुकसान 

जान-बूझकर करवाए 

और 

उसका हर्ज़ाना 

या खामियाज़ा भी 

आपसे ही भरवाए? 

ज़्यादातर सामान्तर घड़ाईयोँ में 

ऐसा सा ही है। 


अब वो नुकसान 

आपकी जानकारी से भी हो सकता है 

और अज्ञानता में भी? 

नुकसान चाहे 

कोई खास ही ना हुआ हो, 

मगर, आप उसका खामियाज़ा 

किसी बीमारी 

या मौत तक भरें? 

हकीकत में ऐसा, संभव है क्या?  

या ऐसा कुछ ही हो रहा है? 


मुझे कुछ-कुछ ऐसा ही समझ आया

ऐसी-ऐसी घड़ाईयाँ देख, सुन 

या समझ कर ऐसा लगेगा, 

ये राजनीती वाले कर क्या रहे हैं?    

या करवा क्या रहे हैं लोगों से? 

Monday, August 5, 2024

Mirror Image बनाना, बड़े या छोटे बाल? सिर के 5

 पार्लर, अनोखी जगह है 

हम सोचते हैं हम वहाँ 

सिर्फ, 

Grooming के लिए जाते हैं? 


साफ़ सफाई?

थोड़ा बेहतर दिखने की चाहता जैसे?

ख़ासकर 

अगर आप कोई नौकरी करते हैं? 

या ऐसा ही कोई व्यवसाय? 

जहाँ व्यक्तित्व प्रभाव रखता है?


या प्रभावी व्यक्तित्व तो 

कहीं भी अहमियत रखता है?

सिर्फ नौकरी या व्यवसाय ही क्यों?

अगर घर रह रहे हैं तो वहाँ भी ?    

या 

घर से कोई काम कर रहे हैं वहाँ भी?

प्रभावी दिखना 

या कम से कम साफ़ स्वच्छ दिखना

किसी भी प्रभावी व्यक्तित्व की पहली पहचान है।  


ऐसे ही 

जिस किसी जगह आप रह रहे हैं 

या काम कर रहे हैं 

उसका भी अपना प्रभाव होता है। 


एक तरफ 

उसका माहौल आप पर प्रभाव छोड़ता है 

तो दूसरी तरफ?  

आप भी थोड़ा या ज्यादा 

उस पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं। 

फिर ये आपकी जानकारी में हो 

या ना हो। 


ऐसा ही कुछ 

बालों की अगली केस स्टडी 

डिज़ाइन? 

"Mirror Image" बनाना, 

बड़े या छोटे बाल? 

सिर के। 


मैंने अपने बाल 

MSc में बढाने शुरु किए थे 

उसके बाद याद नहीं 

कभी छोटे करवाए हों। 


मगर 

कोरोना के बाद कुछ खास हुआ

मेरी पार्लर वाली 

मुझे कई बार सलाह दे चुकी थी  

छोटे बाल करवाने की 

"वो आप पर अच्छे लगेंगे।" 


मगर, 

मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था 

एक दिन उसने

Straightening की सलाह दी 

"रुखे हो रखे हैं 

थोड़ा ठीक हो जाएँगे।" 


मैं पहले करवा लेती थी 

मगर 

ख़ासकर कोरोना के बाद 

जैसे सब बँध कर दिया था 

मुझे बाहर के खाने से ही नहीं 

बल्की, किसी भी तरह के 

केमिकल ट्रीटमेंट से 

नफ़रत हो गयी थी जैसे। 

या कहो 

विश्वास ख़त्म हो गया था। 


उसने कई बार कहा 

"छोटे नहीं करवाने 

तो ये ट्रीटमेंट तो ले ही लो 

Keratin special?

Proper Straightening नहीं।" 



मैंने हाँ कर दी 

बाल जल गए 

ऐसा होना तो नहीं चाहिए था 

खैर। 

हो जाता है, शायद कभी कभी?


वो कहते हैं ना 

"जल गई मगर ऐंठ नहीं गई"  

मेरे हाल कुछ कुछ वैसे ही थे 

उसने कहा 

अगर ज्यादा बुरे लग रहे हैं 

तो छोटे कर देती हूँ 

कुछ वक़्त बाद फिर बढ़ जाएँगे। 


मैंने कहा नहीं 

अब तो ये ऐसे ही रहेँगे 

जब तक फिर से नहीं उगते 

एक डेढ़ साल लगा 

और फिर कभी मैंने 

कोई खास पार्लर ट्रीटमेंट नहीं लिया। 


इससे कुछ और भी समझ आया 

बाल तो पहले ही straight थे 

केमिकल ट्रीटमेंट ने नाश उठा रखा था। 

ये बाज़ारवाद के हर पहलू पर लागू होता है। 


यहाँ घर कुछ और ही चल रहा था 

एक भाई के बालों के साथ 

उसने अपने बाल बढ़ाने शुरु कर दिए थे। 

और वो बहुत गंदे लग रहे थे उस पर 

ज़िंदगी में पहली बार 

इतने लम्बे बाल किए थे उसने। 


जब मुझे कहानी समझ आई 

तो आख़िरकार मैंने उसे 

फिर से बाल छोटे करवाने के लिए 

राजी करवा ही लिया। 

ये राजी 

राजी वाली कोई मूवी नहीं है। 

ऐसे ऐसे धोखों से ही बचना है। 


समझ आया कुछ?

अगर हाँ, 

तो बताओ क्या?

अगर नहीं 

तो पढ़ते रहिए 

आगे काफी कुछ है।  

Sunday, August 4, 2024

Mirror Image बनाना, घुँघराले या सिल्की बाल? 4

कुछ साल पहले 

गुड़िया काफ़ी छोटी थी 

यही कोई 4, 5, साल 

और जाने क्यों मुझे लगा 

उसके बालों की बनावट 

बदल गई हो जैसे?

या बदल रही हो जैसे?


मगर ऐसे कैसे?

जो कुछ पढ़ा था उसके अनुसार 

ऐसा होना सामान्य नहीं 

जिस बच्चे के बाल पैदाइशी 

सिल्की और भूरे हों 

वो घुँघराले 

और काले हो रहे थे जैसे?


रितु ज़िंदा थी उस वक़्त 

उससे पूछा 

ये पार्लर करवाए हैं क्या?

नहीं दीदी,

हम पार्लर कम ही जाते हैं 

क्या हुआ कभी किसी त्यौहार पर 

फिर बच्चे का तो मतलब ही नहीं। 


मुझे भी ऐसा ही लगा 

तुन्हे गुड़िया के बालों में 

कुछ गड़बड़ नहीं लग रही ?


गड़बड़?

कैसी गड़बड़?


बालों का रंग और बनावट 

दोनों बदल गए हों जैसे 

या बदल रहे हों?


अरे नहीं 

थोड़ा बहुत तो 

बदलता रहता है उम्र के साथ। 


थोड़ा बहुत। 

मगर ये थोड़ा बहुत से ज्यादा है।  


मेरी माँ भी उस वक़्त वहीँ थी 

बीच में बोली  

इसके बाप के भी ऐसे ही हैं। 


क्या?

घुँघराले?

कबसे?  मैंने कहा 

 

नहीं। 

उसके कहाँ हैं?

घुँघराले तो नहीं हैं 

हाँ। 

काले जरुर हैं। 

वो इससे काला भी है।  

ये कुछ कुछ बुआ पे है। 

रंग में खासकर। 

रितु ने बीच में बोला। 


सास बहु लगे रहे 

एक बेटे की तरफ 

और एक बेटी 

और बुआ की तरफ। 

हाँ। 

हमारे इस इलाके में रंग, 

अपने आप में रण होता है जैसे। 


मैं उठकर अपने कमरे में गई 

और एल्बम निकाली 

शक और बढ़ गया। 

जाने क्यों चाचा के यहाँ गई 

और चाचा की फोटो देखने लगी 

जो वहाँ कमरे में सामने ही थी। 


चाची से पूछा 

चाचा के बाल शुरु से ऐसे ही थे?

या बदले हैं वक्त के साथ?

उन्होंने बोला ऐसे ही थे। 

और गुड़िया के?

चाचा की लड़की की लड़की 

वो और भी छोटी है। 


जो मुझे समझ आया 

हमारा दिमाग 

बहुत कुछ याद नहीं रखता 

मगर 

तस्वीरें शायद कुछ बोलती हैं? 

वक़्त के हिसाब किताब जैसे?


मेरे लिए ये प्रश्न आम नहीं था 

कुछ और

प्रश्नो के साथ मिल गया था 

जैसे 

कुछ शादियाँ 

और कुछ मौतें?


या 

कुछ Migrations?

Transfer?

Or Displacement?

Enforced?

Or by own will?    

और कुछ मौतें?    


उनकी तारीखें 

महीने और साल 

कह रहे हों जैसे कुछ?

या शायद बहुत कुछ?  

बिन कहे?


माइग्रेशन 

सिर्फ इंसानों के ही नहीं 

बल्की, 

बाकी जीवों के भी। 


और 

किसी घर 

या 

उसके सामान के भी। 

जाने कैसी कैसी कहानियाँ? 

कहते हैं, सुनाते हैं? 

दिखाते हैं या समझाते हैं?   


तो यहाँ डिज़ाइन था 

किसी तरह की 

किसी पार्टी के 

जुए के हिसाब किताब के 

डिज़ाइन वाली 

"घुँघराले या सिल्की बाल"

"Mirror Image" बनाना। 


लोगों के बालों पर?

वो भी 

उनकी जानकारी के बिना?

 

और?

बच्चों तक को नहीं बक्शते?

कैसी राजनीती है ये?


और 

ये सिर्फ़ बालों तक सिमित नहीं है 

आपकी आँखे ठीक ठाक हों 

और वो चश्मा लगवा दें?

या जितना या जैसा नंबर ना हो 

वो दे दें? 


ऐसे ही 

आपको कोई भी बीमारी ना हो 

और वो बिना हुई बिमारी घड़ दें?

ऐसा ही हो रहा है।  


मैं ये सब इतना 

खुलमखुल्ला लिख रही हूँ 

या बता रही हूँ आम लोगों को 

यही दिक़्क़त है इन तानाशाहों को।  


सिर्फ मेरे से ही नहीं 

बल्की 

मेरे जैसे लोगों से। 

Saturday, August 3, 2024

दिमाग़ी किल्ला 3

इंसान के दिमाग़ से ही शुरु करें?

बहुत चलता है ये 

सच में बहुत चलता है

दुनियाँ को कब्ज़ा रखा है इसने। 


हमारा दिमाग़ 

बड़े ही टेढ़े मेढ़े से 

डिज़ाइन वाला दिमाग़ 

खास तरह के चैम्बर में 

छुपा हुआ दिमाग 

कई तहों के अंदर 

बैठा ये दिमाग़ 


अपनी सुरक्षा के लिए 

कैसी कैसी चारदिवारियों 

और कैसे कैसे द्रव्यों की 

सेनाओं के सहारे 

चलाता है ये सिस्टम सारा?

जिसे हम शरीर कहते हैं?


सबसे ऊप्पर खोपड़ी पर 

बालों से ढका हुआ?

अलग अलग जगह 

अलग अलग 

मौसम के अनुसार 

बालों से ढका हुआ। 


बाल भी 

अलग अलग जगह के मौसम 

और वातावरण के अनुसार 

उन्हें झेलने के लिए  

अलग अलग रंग लिए? 

अलग अलग बनावट लिए?

अलग अलग तरह के 

डिज़ाइन जैसे?  

  

कोई छोटे 

तो कोई लम्बे?

कोई पैदाइशी भूरे

या काले

और 

इनके बीच भी 

कितने ही रंग?

सुनहरे?

ज्यादा भूरे?

कम भूरे?

बीच के?

ऐसे ही 

ज्यादा काले 

कम काले?

और इनके बीच के?


ऐसे ही सफ़ेद 

उम्र की रौशनी लिए? 

अनुभवों के गठ्ठर बाँधे जैसे?

या यूँ ही 

उम्र से पहले ही 

वातावरण या मौहाल के 

अलग अलग हादसों के शिकार जैसे?        


कहीं एकदम सिल्की?

और कहीं?

एकदम 

ऐठें, गुथे हुए जैसे?

घुँघराले या सिल्की बाल?

कहीं हल्के हल्के

हौले हौले हवा से तैरते जैसे?

और कहीं?

बधें जाने कैसे कैसे बंधनो में?


इनकी महिमा को 

थोड़ा और जानने की कोशिश करते हैं। 

Friday, August 2, 2024

सिस्टम और डिज़ाइन 2

 जैसा की पहले भी कई बार कहा 

कोई भी चीज़ 

जो आप देख, सुन सकते हैं 

महसूस कर सकते हैं 

या समझ सकते हैं 

एक कोड है

वो कोड एक पार्टी की नज़र में 

कुछ हो सकता है 

और 

किसी और पार्टी की नज़र में कुछ और। 


या 

अलग अलग पार्टियों की नज़रों में 

एक होते हुए भी 

अलग अलग तरह से 

प्रयोग या दुरुपयोग हो सकता है 

अलग अलग वक़्त पर 

उनकी अपनी जरुरत के अनुसार। 


मान लो 

8 नंबर पर वो बच्चे पैदा करवाते हैं 

या ऐसा ही कुछ करते हैं 

ये 8 

अलग अलग पार्टी के अनुसार 

अलग अलग नंबर के साथ मिल सकता है। 


ऐसे ही 

मान लो 

9 नंबर पर 

वो किसी की ऎसी तैसी करवाते हैं 

या 

अलग अलग तरह के बँधे लगवाते हैं 

हिज़ड़े, नपुँसक आदि बनाते हैं 

ठीक ठाक लड़के या लड़कियों को। 


सोच के देखो 

कहीं भी ,

किसी के यहाँ भी 

बच्चे पैदा करवाना 

या लोगों को हिज़ड़े बनाना 

ये काम राजनितिक पार्टियों के हैं क्या?

वो आम लोगों की ज़िंदगियों में 

कहाँ कहाँ घुसे हुए हैं?


या कहो कहाँ नहीं घुसे हुए हैं?

जन्म करवाने से लेकर, मौत तक?

जन्म से पहले conceive करवाने से लेकर 

दाह सँस्कार के तौर तरीकों तक। 

बच क्या गया?


अज़ीब सँसार में हैं ना हम?

अब हर चीज़  एक कोड है 

और अलग अलग पार्टी के हिसाब से 

उसके अलग अलग हिसाब किताब?

इतना कुछ ये पार्टियाँ कैसे कर लेती हैं?

और 

आम आदमी को 

इतना कुछ कैसे समझ आ सकता है?  


राजनितिक पार्टियों के पास 

दुनियाँ जहाँ के दिमाग हैं 

जो या तो इनके लिए काम करते हैं 

या इनके साथ मिलकर काम करते हैं 

वो दिमाग़ इंटेलिजेंस विभाग से लेकर 

डिफ़ेंस और सिविल ऑफिसर्स से लेकर 

यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टिट्यूट में बैठे 

प्रोफेसर, डॉक्टर और वैज्ञानिक सब हैं 

और हाँ 

कहीं की भी न्याय व्यवस्था भी 

उनकी जानकारी के साथ 

या बिना जानकारी के भी। 


ये सब मिलकर 

कहीं का भी सिस्टम बनाते हैं। 

किसी भी इंसान का भी 

उसके घर का 

उसके आसपास का 

समाज, मौहल्ले 

गाँव, शहर राज्य देश का भी। 


आम आदमी के 

इतना कुछ कैसे समझ आ सकता है? 

कोशिश करते हैं 

शब्दों से शुरु कर 

नंबरों 

और तरह तरह के designs 

और सिस्टम तक जाने 

और उसे समझने की। 

Thursday, August 1, 2024

Designer World Art and Craft 1

 Media Culture and Difference Between Life and Death? 

Or healthy living and long life? 


क्या हो? 

जब सामने वाले को मालूम ना हो 

जो कुछ वो 

किसी और के साथ कर रहे हैं 

उसका बिगड़ा रुप 

या कहीं ज्यादा बढ़ा चढ़ा 

कहीं न कहीं 

उनके अपने साथ 

या 

उनकी अपनी बहन, बेटियों 

बेटों, माँ, बाप, पति, बीवी  

या 

घर के किसी और 

सदस्य के साथ हो रहा है? 


कौन कर रहा है?

या कर रहे हैं?

वो भी गुप्त तरीके से?

कौन खेलता है ये गुप्त गुप्त?

ज़्यादातर 

भले लोग तो शायद खेलते नहीं?


जहाँ कहीं आपसे

जिस किसी द्वारा कुछ भी 

गुप्त कुछ करने को कहा जाए

तो थोड़ा दूर हो जाएँ 

थोड़ा वक़्त लें और सोचें?

गुप्त क्यों?

सीधे सीधे क्यों नहीं?   


राजनितिक पार्टियाँ ऐसा ज़्यादातर 

सामान्तर घड़ाईयाँ घड़ने के लिए करती हैं 

ये सामान्तर घड़ाईयाँ ही 

मानव को रोबोट की तरह प्रयोग 

या दुरुपयोग करने का काम करती हैं 

गुप्त रुप से रिमोट कंट्रोल हैं। 


इन गुप्त से डिज़ाइनों का 

आपकी 

या आपके अपनों की IDs से 

कैसा नाता है?  

या किस तरह का असर?   


करते हैं कोशिश जानने की 

इमारतों को 

घरों की और उनके आसपास के  

स्कूलों, अस्पतालों, ऑफिसों के  

डिज़ाइनों को

जो उतार दिए गए हैं    

खिड़की, दरवाजों 

बैडरूम, बाथरूमों 

अंदर बाहर के गेटों 

यहाँ, वहाँ, जहाँ, तहाँ।  


जानने की कोशिश करते हैं 

वाहनों को, दुकानों को? 

गलियों को, उनपे लगे खमभों को 

और तरह तरह के डिज़ाइनों को


या शायद घर के कोने कोने को 

इस हिस्से और उस हिस्से को 

स्टोर, रसोई, बैडरूम, बाथरुम 

आँगन, ड्राईंग रूम वैगरह को?    


क्या कुछ लिखा है? 

या छपा है? 

किस चीज़ के बने हैं वो?

कब लिखा या छपा वो सब?

किसने लिखा या छापा?  

या कहाँ से आया या लाया गया? 

और कौन कौन रहता है वहाँ?


उस या उन रहने वालों पर 

कैसा असर है उन सबका?

जो जितना पास उतना ही 

असर अच्छा या बुरा? 

अच्छे को कैसे बढ़ा सकते हैं?

और बुरे को कैसे कम सकते हैं?


इतना सब मुझे कैसे मालूम?

मुझे सिर्फ़ लिखना है 

जो कुछ पढ़ा, देखा या समझा 

आगे ऐसा है या नहीं 

ये तो आपको तय करना है।