इशारों ही इशारों में? Semiotic Lab Culture (UMCL) 5

इशारों ही इशारों में?   बात बन जाती है?  और बात बनते बनते?  बात टल भी जाती है? या बिगड़ भी जाती है?  होते देखा है ऐसे भी कहीं? गुप्तगू में? म...

Tuesday, August 13, 2024

कोरे कागज़ कहीं नहीं जाते। मगर चंद शब्द लिखे कागज़? 13

 कोरे कागज़ कहीं नहीं जाते 

वो अकसर कोरे ही रह जाते हैं? 

फिर उन्हें आप 

नाव बना 

किसी के घर की तरफ बहा 

पानी में चलाएँ? 

या पेपर प्लेन बना 

पड़ोस वाली लड़की के 

बारजे की तरफ़ उड़ाएँ। 


मगर 

इन्हीं पेपरों पर लिखे 

चंद शब्द 

मामूली से दिखने वाले 

वो चंद शब्द 

तख़्त हिलाते हैं 

बड़े बड़े तानशाहों के 


डरते हैं 

बड़े बड़े तानाशाह भी उनसे 

और हड़बड़ी में 

वो ऐसे ऐसे 

चंद शब्दों वाले पेपरों को 

कहीं छुपा देते हैं जैसे? 


वो ऐसे ऐसे पेपरों पर लिखी 

किताबों पर पाबन्दियाँ लगाते हैं 

चाहे वो लिखी हों 

किसी मामूली सी लड़की ने 

वो डरते हैं 

उनमें लिखे 

उन तानशाहों की 

असलियत के उजागर होने से 


वो उस लड़की को 

अपने so called अफसरों द्वारा 

ड्रामा करवा 

उसका अपहरण करवाते हैं 

एक बिलकुल खाली जगह से 

एक ऐसे ATM से 

जहाँ छुट्टी वाले दिन 

शायद ही कोई जाता हो

 

रात के अँधेरे में 

सुन ए रिया (SUNARIYA)

नामक जेल में डाल देते हैं 

और जाने उसे वहाँ 

क्या क्या सुनाते 

या दिखाते या समझाते हैं। 


तारीख भी ऐसी चुनते हैं 

जब आगे कोई और छुट्टी हों 

ताकी कोर्ट को भी 

बेल देने में वक़्त लगे 


इमरजेंसी के नाम पर 

वो उस पर देश द्रोह ठुकवाते हैं 

ताकी 

उसको देश से बाहर जाने से 

कम से कम कुछ साल 

रोका जा सके 


क्यूँकि 

उसने ऐसा कुछ किया तो हुआ नहीं 

की देश द्रोह ठोका जाता 

हाँ 

केस को

थोड़ा ज़्यादा वक़्त घसीटा जा सकता है 


कुछ वक़्त ख़राब करवा 

वो देश द्रोह 

so called जनसुवाई में जाता है 

देशद्रोह और जनसुवाई? 

और कोई मामूली सी 

स्टम्प के साथ 

स्वाहा हो जाता है?  

ऐसा ही?

या गलत लिख दिया कुछ?


किसी समाज के अनुसार 

इतनी मामूली सी स्टम्प? 

और 

इतना बड़ा मुकदमा ठोकना?   

और 

किसी समाज के अनुसार 

आगे और ईलाज करेंगे तेरा?  

समझ अपनी अपनी?


वो कागज पर उतरे कुछ शब्द 

जो भारत में कुछ साल 

बिलकुल बँध रहे 

जनता की निगाहों से  

वो भी गुंडागर्दी से 

किसी न्यायलय के आदेश से नहीं 


पता चलता है 

जाने किन पतों के सहारे 

US और UK में 

धड़ले से बीके?   

वो भी लिखने वाले की 

जानकारी ना होते हुए। 


कोरे कागज़ कहीं नहीं जाते 

वो अकसर कोरे ही रह जाते हैं? 

फिर उन्हें आप 

नाव बना 

किसी के घर की तरफ बहा 

पानी में चलाएँ? 

या पेपर प्लेन बना 

पड़ोस वाली लड़की के 

बारजे की तरफ़ उड़ाएँ। 


हाँ 

उन पर लिखे चंद शब्द 

और भी बहुत कुछ करते हैं। 

जाने आगे?

और क्या क्या करते हैं?

No comments:

Post a Comment