सुना है हिन्दू हैं हम तो?
और हमारे यहाँ
भगवान
और भगवनियों की
एक लम्बी लिस्ट?
जैसे कदम कदम पर
हमारी बोली बदलती है
वैसे ही
भगवान और भगवानी भी?
देव और देवी भी?
और उनके मँदिर भी?
कभी सोचा क्यों?
बाकी धर्मों की तरह?
हिन्दुओं का भी
एक ही भगवान
या भगवानी क्यों नहीं?
एक ही देव
या देवी क्यों नहीं?
बाकी धर्मों में
एक ही भगवान
या भगवानी है
देव या देवी है?
तो और कई तरह के
ऐसे से ही
रौचक से तथ्य भी?
एक कोशिश है
इन सबको
तर्क वितर्क पर
जाँचने परखने की।
आस्था,
विश्वास जैसे विषयों को?
तर्क वितर्क पर
जाँचना?
या परखना?
आँख बँध कर
सीधा सीधा
मान लेना क्यों नहीं?
जैसे
हमारी दादी माँ
चाची ताई
मानती आयी हैं?
आस्था विश्वास
और टैस्टिंग?
कैसा लगा आपको ये विषय?
थोड़ा और जानने की कोशिश करें इसे?
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