Manipulation and Alterations of Natural Processes?
आपने कठपुतलियों के खेल
बहुत देखे या सुने होंगे?
दुनियाँ कुछ कुछ ऐसा सा ही तमाशा है
कुछ वो खेल खिलाने और दिखाने वाले हैं
तो कुछ उनके इशारों पर नाचने वाले?
खिलाने और दिखाने वालों को पता होता है
वो क्या कर रहे हैं
मगर, उनके इशारों पर नाचने वालों को?
जाने या अनजाने?
किसी की सफ़ेद जीन्स के
धागे निकालना और सफ़ेदी भुगतना?
आपने कहीं कोई जीन्स
थोड़ा आल्टर करने को दी
वो बहुत दिनों वहीं पड़ी रही
और आल्टर भी नहीं की गई।
मगर कहीं से उसके कुछ धागे
जरुर निकाल दिए गए?
उसके काफी वक़्त बाद
आपको कहीं से बताया जाए
उस, टेलर को तो
ये बीमारी हो रखी है
ऐसी कोई बीमारी होती है क्या?
किसी नैचुरल प्रोसेस को
कुछ खास तरीकों से बढ़ाया
या घटाया जा सकता है?
या सिर्फ़
दिमाग़ी भर्म पैदा किया जा सकता है?
जीन्स या कोई भी कपड़ा
आना-जाना है।
ऐसे-ऐसे बहानों से भी
लोगों को क्या बीमार करना?
मगर ये दो धारी तलवार है,
जिसे राजनीतिक
"सामांतर घड़ाईयाँ" कहते हैं।
सोचो
आपसे कोई
किसी का नुकसान
जान-बूझकर करवाए
और
उसका हर्ज़ाना
या खामियाज़ा भी
आपसे ही भरवाए?
ज़्यादातर सामान्तर घड़ाईयोँ में
ऐसा सा ही है।
अब वो नुकसान
आपकी जानकारी से भी हो सकता है
और अज्ञानता में भी?
नुकसान चाहे
कोई खास ही ना हुआ हो,
मगर, आप उसका खामियाज़ा
किसी बीमारी
या मौत तक भरें?
हकीकत में ऐसा, संभव है क्या?
या ऐसा कुछ ही हो रहा है?
मुझे कुछ-कुछ ऐसा ही समझ आया
ऐसी-ऐसी घड़ाईयाँ देख, सुन
या समझ कर ऐसा लगेगा,
ये राजनीती वाले कर क्या रहे हैं?
या करवा क्या रहे हैं लोगों से?
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