08/04/25

Location Matters? How Much? And Why? (IDs & LAIs) 8

 धकेलना 

जैसे शादी की तरफ? 

या 

बड़ी गुंडागर्दी की तरफ़? 

या चलते करना? 

दुनिया से ही जैसे? 


जैसे?

H # 30, TYPE 4 ?

या 13, TYPE 4?

या 31, 32 33 34?    


अपनी ही तरह के? 

कितने ही? 

अजीबोग़रीब कोड? 

या कोढ़ लिए हुए? 


कैसे कैसे ?

TEMPLE ?

MOSQUE? 

CHURCH?

या 

GURUDWARE जैसे?


इन जैसे एक शब्द से ही 

या कोड या कोढ़ से 

और? 

कितनी तरह के 

कोड या कोढ़ 

डिज़ाइन हो सकते हैं? 


ऐसे ही और भगवानों 

या भगवानियों के?

देवों या देवियों के?

सिर्फ़ Location में ही नहीं? 

साँकेतिक से नंबर में ही नहीं?

ढालों या भालों में भी?


उनके वाहनों 

वस्त्रों, अस्त्रों, 

गहनों 

रंग रुपों 

या मनोरंजन जैसे 

संसाधनों में भी?   

कितना कुछ छुपा होता है?

सब गुप्त गुप्त सा?  


बिलकुल ठीक वैसे ही 

जैसे 

आपके अपने घर की Location

और  

उसके चारों तरफ की Interactions 


खाना पानी 

पहनावा 

भाषा में भी 

साँकेतिक सा जैसे 

कितना कुछ छुपा होता है?

बिलकुल गुप्त गुप्त सा?


इसलिए 

Cult Politics से 

डरने की बजाय 

उसे समझना 

और 

उसका समाधान करना 

ज्यादा अहम है। 


या 

सीधी सी बात?

जितना कम 

इनके चककरों में इंसान?

उतनी ही आसान 

और सहज़ ज़िंदगी?    

07/04/25

Location Matters? How Much? And Why? (IDs & LAIs) 7

 RING ROAD?

शादी से पहले 

Engagement जैसे?

पहले ज़माने में 

सगाई हो गई 

तो 

शादी पक्की होती थी?

 

मगर 

अब ऐसा नहीं है?

क्यों?

क्यूँकि   

अब शादी से पहले ही 

बहुत तरह के YUDH होते हैं   


तो निर्भर करता है?


शिक्षा के सँस्थान को 

कोठे पर बिठाना जैसे ?

और 

साथ में शिक्षाविदों को भी?

वो भी शिक्षा के so called 

सबसे ऊँचें स्तर पर (University)?  


ये दिमाग में कहाँ से आया? 


ऐसे ही 

घरोँ के मुद्दे?

या 

घिनौनी राजनीती के? 


गुंडागर्दी के?

छोटी गुंडागर्दी के कोड से? 

H #16, TYPE 3 जैसे? 

माथे पे ठोकी गई 

कोई स्टम्प जैसे? 


या धब्बा कोई? 

या 

TRISHANA जैसे कोई? 


या 

इसी को कहते हैं 

शिव का चिन्ह?

PURE FOR SURE?

लड़कियों द्वारा 

सोमवार को शिव के 

16 FAST (बर्त) जैसे?

 

होती हैं यहाँ 

लड़कियाँ टैस्ट जैसे?

और 

शायद लड़के भी?

अब वो टैस्ट 

शादी से पहले होता है?

या बाद में?

एक दूसरे की मर्जी से होता है?


या राजनितिक चालों से?

या 

so called कोर्ट करवाते हैं?


या शिक्षा के सँस्थान?

लड़का लड़की को पता होता है?

उनका कोई खास 

टैस्ट हो रहा है?


एक दूसरे के हो जाने की 

कसमें या वचन? 

पहले होते हैं?

या बाद में?


खुलमखुला होते हैं?

या गुप्त?  

या कभी भी नहीं?   

ऐसी ऐसी टैस्टिंग 

आदमियों की कहाँ होती है?  

मशीनों की टैस्टिंग करते हैं शायद?


फाइल फाइल के खेल में?

या खेल के मैदान पर? 

या 

समाज के किसी भी हिस्से पर?

किसी भी तरह की जगह पर?  

किसी भी तरह से संभव है?     


KHATU TYPE TEST 

घर पर ही होता है?

या किसी HOTEL?

या HOSTEL?

या GUEST HOUSE?

या कहीं और ही?


जिस LOCATION पर 

जहाँ कहीं होता है 

उस LOC को 

PAR करने के 

कितने तरीक़े होते हैं?

Methodology? 

Location पर निर्भर करती है? 


इस LOCATION 

और Metodology में ही 

उस रिश्ते का भविष्य छुपा होता है?

तो Location बहुत अहम है? 


और इन सबसे अहम?

वक़्त? 

तारीख़, महीना और साल? 

सुबह, दोपहर, श्याम या रात?


सुबह

खिली खिली सी रहती है?

दोपहर तपती सी जैसे?

ओह ! 

हर जगह, हर वक़्त 

दोपहर कहाँ तपती है?

श्याम को 

श्याम जी आते हैं?

और 

रात वालों की 

रात सी ही रहती है?      


जहाँ 

शिव महिमा गाई जाती है? 

वहाँ टैस्टिंग मतलब?

BHALA (भाला) जैसे कोई?  

भाले का सँकेत?

3 पे एक?

या 3 पे डंडा?

   

या TRISHUL (त्रिशूल)? 

TRISH?

TRISH A ? NA ?

या TRISH A ? NA ?

या शिव ताँडव जैसे? 


ऐसे ही T की जगह 

कोई भी शब्द लगाओ 

और कुछ भी बना दो? 

जैसे KRISH?

या KRISH NA?


धकेलना 

जैसे शादी की तरफ? 

बड़ी गुंडागर्दी की तरफ़? 

या चलते करना ? 

दुनिया से ही जैसे? 


जैसे?

H # 30, TYPE 4 ?

या 13, TYPE 4?

या 31, 32 33 34?    


अपनी ही तरह के? 

कितने ही? 

अजीबोग़रीब कोड? 

या कोढ़ लिए हुए? 

कैसे कैसे ?

TEMPLE ?

MOSQUE? 

CHURCH?

या 

GURUDWARE जैसे?

06/04/25

Location Matters? How Much? And Why? (IDs & LAIs) 6

 Testing, Location and Interactions And What Type of Life or Fights at Some Specific Places? 

And Why? 


करलो बात 

ये मंदिर जाती है 

तो ये सब देखती 

या पढ़ती है?

घोर कलयुग?


ये तो 

कब से चला आ रहा है?

हमारे, 

आपके 

पैदा होने से भी 

कहीं ज़्यादा पहले से?

माँ दादी के भी वक़्त से पहले?


अब में 

और तब में फर्क क्या है?

आज की पीढ़ी भगवान 

या भगवानियों को भी 

ठोक बजाकर देखती है?

असली है या नकली?


भगवान या भगवानी

कुछ अलग है? 

या आदमी के जैसे से ही?

तभी तो उनकी मूर्ति भी 

ज़्यादातर आदमी की ही 

सूरत होती हैं?


तो आओ 

भगवानों 

भगवनियों 

देवों 

या देवियों से मिलें?


आम बोलचाल की भाषा से भी?

पहनावों? 

और रीती रिवाज़ों से भी?

और भी कितना कुछ?

राजनीती के 

और बाज़ार के 

जालों में गुँथा जैसे?       


Cultural Evolution or Devolution as per Politics and Market Needs and Greeds? And that is known as System of any place?

05/04/25

Location Matters? How Much? And Why? (IDs & LAIs) 5

 Testing, Location and Interactions?

And What Type of Life 

Or Fights at Some Specific Place? 

And Why? 


धँधा टैस्टिंग? 

या टैस्टिंग का धँधा?

जगह, वक़्त? 

और 

भगवानो की महिमा?

किसी भी समय के? 

और उस वक्त के 

रीती रिवाज़ के तड़के जैसे?  


तो आप हैं भगवान?

कोड 

या 

कोढ़ क्या है आपका?

GOD? 


गोड?

G OD?

या GO D?

ऐसे ही 

जैसे GODESS?

GO DE SS?


या 

G 1 

O 2

D 3

E 4

S 5

S 6


ऐसे ही जैसे गोड होता है, 

वैसे ही  

सुना, पढ़ा कहीं? 

G SPOT भी होता है? 

GROIN एरिया के आसपास घुमता है? 


वो माता की पिंडी जैसे?

या कामख्या का मँदिर? 

ऐसे ही जैसे शिव मँदिर?

या?  

कैसे कैसे मँदिर हैं ना?

मगर ऐसे कैसे?

  

कभी सोचा आपने?

जब आप किसी भी 

मँदिर जाते हैं?

तो 

उसकी LOCATION?

उसके मंदिर का उदय?

उसका फ़ैलाव?

उसका पुजारी?

इन सबके बारे में?

 

या 

ज़्यादा पैसा आने लगा? 

या भीड़ बढ़ने लगी?

तो उसकी सिमिति?

उस मंदिर का 

अपना बैंक कोष?

खाता कोई?


किस बैंक में?

किस जगह?

किसके नाम?

उसकी खाता सँख्या?     

और भी न जाने कितनी ही 

ऐसी ऐसी सी और डिटेल्स?         

 

राम राम राम? 

कैसा जमाना है ना?

कैसे कैसे भगवान?

और कैसी कैसी मातायें?    

OUT SKIRT जैसे?

थोड़ा और बाहर हो गया वो तो?

ऐसे ही RING ROAD जैसे?


कभी सोचा 

RING ROAD को 

RING ROAD ही क्यों कहते हैं?

क्यूँकि 

RING के जैसा सा है?

R IN G?

जैसे अगुँठी?

या अखाड़ा कोई?  

  

और ये 

हर गाँव 

या शहर में क्यों नहीं हैं?


System, Code and Conflict of Interest Politics?

04/04/25

Interactions and Interactions Design (IDs & LAIs) 4

 Migration


Experiment? 

किन्हीं पौधों को 

एक जगह से 

दूसरी जगह, 

दूसरी जगह से 

तीसरी जगह, 

यहाँ से वहाँ 

वहाँ से वहाँ 

और कहाँ कहाँ? 

कैसे कैसे मीडिया में? 

Migrate करना? 


दूसरी तरफ 

जो जहाँ है 

उसे वहीँ रहने देना? 

या एक समय बाद 

एक से 

दूसरी जगह माइग्रेट करना? 


Plants Tales : Andhere Ujaale? 

साँकेतिक 

वाद विवाद का केस है? 

ऊप्पर जो लिखा उसमें 

और इस केस में 

कोई समानता है क्या? 

शायद हाँ?

और 

शायद नहीं भी?


हाँ?

क्यूँकि पौधों पर Experiment 

थोड़ा आसानी से किया जा सकता है? 

मगर 

बाकी जीवों पर?

ज़्यादातर देखा 

या समझा ही जा सकता है?  

मगर क्या हो 

अगर हक़ीक़त कुछ और ही हो?


राजनीती के लिए 

पौधे और बाकी जीव तो क्या 

जीव और 

निर्जीव में ही फर्क नहीं है?

इतनी क्रूरता?      


जैसे 

Plants Tales : Andhere Ujaale? 

उसमें सिर्फ शब्द 

या उनका हेरफेर ही नहीं है

और भी बहुत कुछ है 

साँकेतिक सा जैसे?  


कुछ नाम हैं  

कुछ प्रोफेशंस हैं 

कुछ किरदार हैं 

कुछ इंसान हैं 

कुछ पेड़ पौधे हैं 

कुछ हेराफेरी हैं?

 

और 

किसी को जबरदस्ती 

कहीं धकेलने की कहानी है? 


बिना जानकारी? 

बिना ईजाजत? 

जानकारी के बाद?

विरोध के बावजूद?

ये केस घड़ने वाले 

और ऐसा करने वाले कौन हैं?

ठीक ऐसे ही बाकी सब केस हैं। 


कुछ एक Script हैं 

जो Design हैं 

और Engineered हैं 

एकदम Programmed ऐसे 

जैसे?

जो कुछ भी 

उन फाइल्स में चलता है 

वैसा वैसा सा ही 

बाकी समाज में भी? 


कहीं के भी 

राजनितिक सिस्टम द्वारा 

अपनी अपनी जरुरतों 

और 

सहूलियतों के अनुसार 

घटा, जमा, गुना, भाग 

ऊप्पर, नीचे किया गया? 

झूट या सच है? 

या आईना जैसे? 


अब वो आईना 

कितना हक़ीक़त के करीब है? 

और कितना दूर? 

ये तो 

उस आईने की हकीकत ही बता सकती है। 


सर्वर या सरवर?

तर्वर या तरवर?  

कौन इधर से 

कौन उधर से?

कब कहाँ 

आ मिलते हैं? 

जाने अनजाने?


या किसी Design के तहत?

Interaction Design? 

Online या Offline? 

बड़ा ही रौचक विषय जैसे?


और आप समझें 

जो कुछ हो रहा है 

वो सब अपने आप हो रहा है?

जिस किसी से आप मिलते हैं 

ऐसे ही अचानक से जैसे 

अपने आप मिलते हैं?

या जो कुछ आप करते हैं 

ऐसे ही खुद ही तो करते हैं?

  

जैसे?

Social Tales of Social Engineering? 

Political Parades of Animals? 

ऐसी सी ही 

हकीकत की ज़िंदगियों की कितनी ही कहानीयाँ ? 

03/04/25

IDs, Locations and Interactions (IDs & LAIs) 3

 Visual Clutter Vs Visual Appeal


जितने गरीब घर 

उतना ही 

Visual Clutter भी?

जितना समृद्ध घर 

उतनी ही Visual Appeal भी?


सिर्फ घर ही नहीं 

बल्की 

ऐसा सा ही 

इंसानों के साथ है 

और 

ऐसा सा ही 

आसपास भी?  


Interactions 

Matter करती हैं 

सिर्फ़ जीवों से ही नहीं 

बल्की 

निर्जीवों से भी?  


एक आप आँख खोलते हैं 

और Visual Appeal 

दिमाग़ में घुसती है?

और दूसरी तरफ?

Visual Clutter?

अच्छा कहाँ लगता है?

आपको मालूम ना होते हुए भी 

आप कैसा अनुभव करते हैं?     


अमीरों और गरीबों की 

बिमारियों का 

थोड़ा अलग अलग सा नक्सा 

इसी Visual Appeal 

या Visual Clutter के 

रहस्य जैसा सा है। 


Archi Tact 

या 

Archi Design सा जैसे? 


कुछ कुछ ऐसे 

जैसे 

जहाँ जहाँ पैसा ज़्यादा होता है 

वहाँ वहाँ 

सब अपने आप जैसे  

चमकता सा नज़र आता है? 


और जहाँ जहाँ कम 

वहाँ वहाँ?

पैसे से आगे भी 

कितने ही और factors 

ऐसे ही काम करते हैं?   


जैसे   

हर स्टोर  

Biomarkers रखता है

Footprints 

या Fingerprints जैसे कोई?  

Biometric के जैसे से?


जैसा जैसा उसमें सामान 

वैसे वैसे से 

उसमें Markers? 

भले के या बुरे के?  


आपकी IDs 

जहाँ कहीं आप रहते हैं 

या काम करते हैं 

उस Location की IDs से 

Interact करती हैं 

उन्हीं Interactions के अनुसार 

आप Act या React करते हैं? 


या Respond करते हैं? 

उसी अनुसार 

वहाँ आपकी ज़िंदगी कैसी होगी 

ये तय होता है। 


सीधी सरल भाषा में?

अच्छा सिस्टम, अच्छी ज़िंदगी?

बुरा सिस्टम 

बुरी ज़िंदगी?

फिर क्या IDs को पढ़ने बैठना?     


बस इतना ही?

या इससे आगे भी बहुत कुछ?  

जैसे Interactions? 

अपने आप होती हैं क्या?

या जहाँ कहीं आप रहते हैं 

या काम करते हैं 

वहाँ का सिस्टम तय करता है?  

और आपको ख़बर तक नहीं होती? 


ये सिस्टम 

सबसे पहले आप खुद हैं 

फिर आपका घर 

उसके बाद आसपास 

या 

उसके आगे के सिस्टम से 

Interactions आती हैं। 


Conflict of Interest Politics को 

जितना अपने और 

अपने घर 

या आसपास के सिस्टम से 

दूर रखोगे 

ज़िंदगी और रिश्ते 

उतने ही आसान और सही होंगे। 

02/04/25

IDs, Locations and Interactions (IDs & LAIs) 2

 स्थायी IDs पर  

आपके सारे जीवन का

सार लिखा हुआ है? 

डाटा लिखा हुआ है? 


पैदाइश से ही?

या 

उससे भी पहले से? 

स्थाई IDs 

उस स्टोर की तरह हैं 

जो सबसे पुराना है। 


पढ़े लिखे और कढ़े लोग 

किसी भी स्टोर की तरह 

अपनी IDs का 

खास ख्याल रखते हैं 

आम आदमी को 

उनका महत्त्व ही 

नहीं पता होता? 


जो कोई स्टोर 

जितना पुराना है 

उसमें अगर 

उतना ही पुराना कबाड़ है 

तो? 

ज़िंदगी भी कबाड़ जैसे?


इसलिए 

किसी भी स्टोर को भी 

साफ़ सफाई की जरुरत होती है। 


जो आपके काम का नहीं है 

जिसकी 

कोई खास वैल्यू भी नहीं है? 

उसे चलता क्यों नहीं कर देते?

या दे क्यों नहीं देते किसी को? 

एक निगाह तो डालो 

क्या क्या है ऐसा वहाँ?  


उस पढ़े लिखे और कढ़े में 

और आम आदमी में 

फर्क ये है 

वो सिर्फ़ कीमती और 

काम का सामान रखता है?

 

और आप?

अकसर अपने काम का 

और कीमती सामान भी 

उसको सौंप देते हो?

और अकसर कबाड़ पर

या खामखाँ सी बातों पर  

लड़ते झगड़ते रहते हो?   


जो घर जितना साफ़ है 

या दाग़ रहित है 

उतना ही उसका रुतबा भी?

सच है क्या?

या जरुरी नहीं?  


स्टोर की तरह ही 

एक निगाह 

उस रसोई पर?

बैड रुम पर?

बाथरुम पर?

ऐसे ही  

घर के हर एक कोने पर?


गुप्त सिस्टम के अनुसार 

घर के हर हिस्से के 

कुछ और ही मतलब हैं। 

कुछ कुछ ऐसे 

जैसे राजे महाराजों की 

लड़ाईयों के?

युद्धों के?

राजनीती के जैसे से?  

    

राजनितिक सिस्टम बनाने वाले 

खामखा से 

और 

जाने कैसे कैसे से? 

सामान से 

यूँ ही जैसे?

आपके अपने घर तक में 

बदलाव करते रहते हैं 

और वो भी ज़्यादातर 

आपकी जानकारी के बिना?


संभव है?

या ऐसा हो रहा है?    

आपको तो लगता है 

ज़्यादातर सामान 

आप खुद ही लाएँ हैं?

 

अपनी पसँद से?

या शायद 

कभी अपनी पसँद से?

और अब वो कबाड़ हो चुका?

मगर फिर भी रखा है 

ऐसे ही?    


यहाँ 

सामान की बात हो रही है 

आदमी की नहीं 

कहीं उन्हें भी सामान सा 

कबाड़ समझने लगें। 

या शायद 

बहुत से समझते ही ऐसे हैं?

 

जैसे 

कैसे कैसे 

सामान की भी किम्मत? 

और आदमी की भी कुछ नहीं? 

01/04/25

Methods of Human Robotics कोडों के इशारे "आपकी ज़ुबान पर सरस्वती बैठती है" MHR 1

  वो जब कहते हैं 

"आपकी ज़ुबान पर सरस्वती बैठती है" 

जो भी बोलो, सोच समझ कर ही बोलो 

कहीं सच ना हो जाए 

वो उसी, उनके द्वारा बनाए गए 

सिस्टम के कोड की तरफ ईशारा होता है 


ऐसे ऐसे से कितने ही कोडों के इशारे 

अक्सर ऐसे ही छुपे बैठे होते हैं 

एक तो साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट होता है 

और दूसरा?

गुप्त सिस्टम हर बात को, हर इशारे को 

अपने निहित स्वार्थ के लिए प्रयोग या दुरुपयोग करता है।  

जिस किसी में, जिस किसी पार्टी का भला होता है 

वो उन्हीं बातों या कामों को 

बढ़ाचढ़ा कर या घुमाफिरा कर पेश करते हैं।

चाहे वो सच हो या ना हो 

चाहे वो सच के एकदम विपरीत ही क्यों ना हो 

जिसके ढेरों उदाहरण एक निगाह दौड़ाने पर 

आपके अपने आसपास भरे पड़े मिलेंगे